महान महाराणा प्रताप के बारे में कुछ बाते।

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महाराणा प्रताप काफी प्रतापी राजा थे।वे अभी राजा में सबसे भुजंग राजा था।जिनका सीन छपन इंच का था।लेकिन अपने भाईयों की वजह से वे अकबर के सामने मारे गए।आज उसी प्रतापी राजा महाराणा प्रताप के बारे में हम जानेंगे।उनकी गाथा।उनकी इतिहास के बारे में

mharana pratap

महाराणा प्रताप कौन थे?

==>महाराणा प्रताप एक महान राजा थे।जिनका शरीर और राजा के तुलना में काफी बड़ा था।वे सबसे भुजंग राजा माने जाते थे।उनका जन्म राजस्थान में राजपुत परिवार में हुए था।और वे वही के राजा थे।उदयपुरमेवाड में सिसोदिया राजपूत राजवंश के राजा थे। उनका नाम इतिहास में वीरता और दृढ प्रण के लिये अमर है। उन्होंने कई सालों तक मुगल सम्राट अकबर के साथ संघर्ष किया। महाराणा प्रताप सिंह ने मुगलों को कईं बार युद्ध में भी हराया। उनका जन्म राजस्थान के कुम्भलगढ़ में महाराणा उदयसिंह एवं माता राणी जयवंत कँवर के घर हुआ था। लेखक जेम्स टॉड़ के अनुसार महाराणा प्रताप का जन्म मेवाड़ के कुंभलगढ में हुआ था । इतिहासकार विजय नाहरके अनुसार राजपूत समाज की परंपरा व महाराणा प्रताप की जन्म कुंडली व कालगणना के अनुसार महाराणा प्रताप का जन्म पाली के राजमहलों में हुआ।

महाराणा प्रताप के बारे में कुछ खीसे।

वफादार मुसलमान ने बचाई थी महाराणा की जान

1576 में महाराणा प्रताप और अकबर की सेना के बीच यह युद्ध हुआ. अकबर की सेना को मानसिंह लीड कर रहे थे. बताते हैं कि मानसिंह के साथ 10 हजार घुड़सवार और हजारों पैदल सैनिक थे. लेकिन महाराणा प्रताप 3 हजार घुड़सवारों और मुट्ठी भर पैदल सैनिकों के साथ लड़ रहे थे. इस दौरान मानसिंह की सेना की तरफ से महाराणा पर वार किया जिसे, महाराणा के वफादार हकीम खान सूर ने अपने ऊपर ले लिया और उनकी जान बचा ली. उनके कई बहादुर साथी जैसे भामाशाह और झालामान भी इसी युद्ध में महाराणा के प्राण बचाते हुए शहीद हुए थे.

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भाई शक्ति सिंह विरोधी हो गए थे, फिर प्रेम जाग गया

हल्दीघाटी के बाद महाराणा जब बचकर कुछ दूर पहुंच गए उसी समय महाराणा को किसी ने पीछे से आवाज लगाई- “हो, नीला घोड़ा रा असवार.” महाराणा पीछे मुड़े तो उनका भाई शक्तिसिंह आ रहा था. महाराणा के साथ शक्ति की बनती नहीं थी तो उसने बदला लेने को अकबर की सेना ज्वाइन कर ली थी और जंग के मैदान में वह मुगल पक्ष की तरफ से लड़ रहा था. युद्ध के दौरान शक्ति सिंह ने देखा कि महाराणा का पीछा दो मुगल घुड़सवार कर रहे हैं. तो शक्ति का पुराना भाई-प्रेम जाग गया और उन्होंने राणा का पीछा कर रहे दोनों मुगलों को मारकर ऊपर पहुंचा दिया.

महाराना प्रताप के कुछ खास बातें:-

हल्दीघाटी का युद्ध मुगल बादशाह अकबर और महाराणा प्रताप के बीच 18 जून, 1576 ई. को लड़ा गया था. अकबर और राणा के बीच यह युद्ध महाभारत युद्ध की तरह विनाशकारी सिद्ध हुआ था.

2. ऐसा माना जाता है कि हल्दीघाटी के युद्ध में न तो अकबर जीत सका और न ही राणा हारे. मुगलों के पास सैन्य शक्ति अधिक थी तो राणा प्रताप के पास जुझारू शक्ति की कोई कमी नहीं थी.

3. महाराणा प्रताप का भाला 81 किलो वजन का था और उनके छाती का कवच 72 किलो का था. उनके भाला, कवच, ढाल और साथ में दो तलवारों का वजन मिलाकर 208 किलो था.

तो ये थी कुछ बाते हमारे महान वीर महाराणा प्रताप के बारे में।हम सभी हिन्दू हमेशा हमारे महान राजा महाराणा प्रताप के जज्बे को सलाम करता रहेगा।और हम सभी ये प्रथना करते रहे कि भगवान ऐसे ही वीर प्रताप को हमारे देश मे पैदा करते रहे।महाराण प्रताप बहुत ही दयालु राजा थे।और वे ही एक ऐसे राजा थे जिनसे अकबर डर डर के कपता था।ये ऐसे ताकतवर राजा थे जो अकबर के सैनिक को उसके घोड़े के साथ साथ उसके सैनिक को बीच से फार(काट) डाले थे।

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